Tuesday, 9 January 2018

यादें तुम्हारी अनगिनत - Yadein Tumhari Anginat

क्या लिखूं, हैं आज भी यादें तुम्हारी अनगिनत 

सोच भी सकता नहीं, बातें तुम्हारी अनगिनत 

चुप रहूँ तो भी मेरी आँखें दिखा देती ही हैं 
बीते हुए लम्हों की वो तस्वीर तेरी अनगिनत 

एक तो ये मासूम चेहरा और उसपर सादगी 
हर कदम पर देखती हैं तुझको नज़रें अनगिनत 

अनगिनत यादों में तेरी, अनगिनत मेरी ख़ुशी 
अनगिनत तेरी हँसी, तेरी अदायें अनगिनत 

अनगिनत अजनबी चेहरे अनगिनत आवाज़ है 
याद रह पाती नहीं, पहचान इनकी अनगिनत

इस शहर में लोग तो मिलते बड़े अदब से हैं 
पर नहीं अपना कोई, बस 'नाम' मिलते अनगिनत

जब कभी मायूस मैं होता हूँ तेरी याद में 
गुदगुदा जाती हैं मुझको, बातें तेरी अनगिनत

सोचता हूँ, क्या लिखूँ, कैसे लिखूँ , कितना लिखूँ
अनगिनत तो याद आए, कह ना पाऊँ अनगिनत

-ABHISHEK SINGH

-अभिषेक सिंह 

आज भी है - Aaj Bhi Hai....

मेरी  दुनिया,तेरी  दुनिया  से आहत आज भी है 

तेरी चाहत की चाहत मेरे दिल में आज भी है 

कभी मैं कह न सका तुमसे अपने दिल की बातें
मेरे दिल में रहो ये मेरी हसरत आज भी है 

दिखायी  देती है जो बंद पलकों के गगन में 
चमकते चाँद सी वो तेरी सूरत आज भी है 

मेरी आँखों में कोई दर्द समाता नहीं अब 
कि तेरी मुस्कराहट मेरे दिल में आज भी है 

नहीं रहती है अब खामोश ये तन्हाइयाँ भी 
तेरी उड़ती हुई जुल्फों की आहट आज भी है 

ना  जाने क्या हुआ है, दोस्त सब रूठे हैं मुझसे 
तेरे होंठो पे मेरा नाम शायद आज भी है 

-Abhishek Singh 
-अभिषेक सिंह